अधिगम - कठिनाईया एवं निदान : Learning difficulties and diagnosis

अधिगम : कठिनाईया एवं निदान


    अधिगम में बालक के द्वारा कठिनाई का अनुभव करना एक आम बात है। कुछ बच्चे सामान्य होते हैं। पर कुछ सदैव इन समस्याओं से ग्रस्त रहते हैं। नेशनल एडवाइजरी कमेटी फॉर हैण्डीकेपड़ ने इसे अधिगम निर्योग्यताओं (Learning disabili ties) की संज्ञा दी है। इसने इनकी परिभाषा देते हुए लिखा है,
अधिगम कठिनाईया एवं निदान
अधिगम कठिनाईया एवं निदान
"अधिगम निर्योग्यताओं से युक्त बालकों की मनोवैज्ञानिकों प्रक्रियायें प्रभावित होती हैं जिनका प्रयोग अवबोध व भाषा के मौखिक एवं लिखित प्रयोग में होता है। अधिगम विकृतियाँ बालकों के सुनने, बोलने, लिखने, वाचन, वर्तनी व गणित में परिलक्षित होती है।"

    अधिगम करने में बालक को भाषा संबंधी, बोध संबंधी एवं संवेगात्मक जो कठिनाईयाँ होती हैं उन्हें ही अधिगम कठिनाईयाँ कहा जाता है।

    इन कठिनाईयों का निदान एवं पहचान व्यवहारगत संकेतकों से की जा सकती है। बालक के व्यवहार में इन्हें देखा जा सकता है। डॉ.रीता अरोड़ा एवं सुरेश मारवाह के अनुसार व्यवहार गत संकेत जिनके द्वारा अधिगम कठिनाईयों की पहचान की जा सकती है, जो निम्नानुसार हैं:
- औसत, औसत के पास व औसत से अधिक बौद्धिक योग्यता। 
- बातचीत को एवं कार्यों को बिना सोचे समझे करना।
- कार्य में ध्यान केन्द्रण में कभी। 
- अनुपयुक्त प्रत्यक्षीकरण। 
- लिखने व उतारने में उल्टा कर देना। 
- मौखिक संदेश को समझने व स्मृति धारण में कठिनाई। 
- दृश्य प्रतिमाओं को स्मृति में धारण करने व निर्वचन में कठिनाई। 
- कार्य के प्रति प्रयास एवं त्रुटि उपागम को अपनाना। 
- अमूर्त विचारों से संबंधित वैचारिक कठिनाई। 
- शीघ्र उत्तेजित होना। 
- उत्तेजना के बावजूद विलम्बित क्रिया। 
- वाचन के समय पंक्तियों को छोड़ देना। 
- सूक्ष्म गामक समन्वयन का निम्न स्तर। 
- वैचारिक अस्पष्टता। 
- शब्दों में अक्षरों को अपनी ओर से जोड़ना, छोड़ देना. या उल्टा कर देना। 
- मौखिक निर्देशों का पालन न करना। 
- संख्याओं को उल्टा कर देना। 
- गणीतीय चिह्नों में विभ्रम की स्थिति। 
- शीघ्र विचलित व परेशान हो जाना। 
- शीघ्र विस्मरण की प्रवृत्ति।
    अधिगम कठिनाईयों की पहचान निदानात्मक परीक्षण से भी की जा सकती है। इसके अतिरिक्त बालकों की गामक, सामाजिक, भाषिक एवं श्रवणात्मक अर्थग्रहण की योग्यता के आधार पर अधिगम निर्योग्यताओं की पहचान के लिए निम्नांकित परीक्षण उपयोगी होते हैं।

1. Information Reading Inventory. 
2. Informal Graded Word Test. 
3. Informal arithmetic test. 
4. Weschler intelligence scale for children.. 
5. Stanford- Binet intelligence scale. 
6. Peabody Picture Vocabulary Intelligence scale. 
7. Illinois test of psychologistic abilities. 
8. Kaulman test of educational assessment.. 
9. Vindand social maturity scale. 
10. Lincoln motor development scale.

    भाषा, प्रत्यक्षीकरण एवं संज्ञानात्मक प्रकम्रणों का मापन Detroit test of learn ing aptitude द्वारा किया जा सकता है।

अधिगम कठिनाईयों के प्रकार Types of Learning Difficulties 
    कर्क, क्लीबान एवं लर्नर (Kirk, Clibhan and Lerrer) ने अधिगम कठिनाइयों में निम्नांकित कठिनाइयों को सम्मिलित किया हैं -

- सांवेदिक गामक निर्योग्यताएँ। 
- प्रत्यय निर्माण में समस्या। 
- स्मृति संबंधी समस्याएँ।' 
- सीमित अवधान विस्तार। 
- परिपक्वता की धीमी गति। 
- सांवेदिक समस्याएँ।

अधिगम कठिनाईयों में भाषागत, प्रत्यक्षीकरण एवं गामक योग्यता संबंधी तथा सामाजिक एवं संवेगात्मक कठिनाईयाँ आती हैं।

1. भाषागत कठिनाईयाँ 
इनमें निम्नांकित सम्मिलित हैं । 
- भाषा को ग्रहण करने एवं अभिव्यक्ति में कठिनाई।।
- भाषा के उच्चारण, स्वराघात, बलाघात संबंधी कठिनाई। 
- वाक्य संरचना की समस्या।
- सर्वनाम के प्रयोग, नकारात्मक वाक्यों, विशेषण विशेष्य एवं काल संबंधी कठिनाईयाँ।
- सुलेख, वर्तनी, विराम चिह्नों के प्रयोग संबंधी कठिनाईयाँ। 
- बिना अर्थग्रहण किये वाचन करना। 
- शब्दों को लिखने व अक्षरों की बनावट संबंधी कठिनाईयाँ। 
2. प्रत्यक्षीकरण एवं गामक योग्यता संबंधी कठिनाईयाँ (Difficulties related to perceptual and motor ability) 
इसके अन्तर्गत निम्नांकित कठिनाईयाँ आती हैं : 
- संवेदनाओं को पहचानने, विभेद करने एवं निर्वचन करने में कठिनाई। 
- दृश्यात्मक संकेतों को समझने में कठिनाई। 
- श्रव्य संकेतों को समझने में कठिनाई। 
- स्पर्श के आधार पर वस्तुओं की पहचान करने में कठिनाई। 
- अंग संचालन में समन्वय बनाने में कठिनाई। 
- एक स्थान पर टिककर बैठने में कठिनाई। 
- ध्यान केन्द्रित करने में कठिनाई। 
- मांशपिशियों में समन्वय बनाने में कठिनाई। 

3. सामाजिक एवं सांवेगिक कठिनाईयाँ Social and emotional difficulties - 
-संवेगात्मक स्थिरिता में कठिनाई। 
- संवेगों पर नियंत्रण स्थापित करने में कठिनाई। 
- समायोजन में कठिनाई। 
- संयम रखने में कठिनाई।

उपर्युक्त के अलावा भी कुछ कठिनाईयाँ होती हैं; जैसे ध्यान केन्द्रित करने में कठिनाई, विचारों की स्थिरता में कठिनाई, आदि।

अधिगम कठिनाईयों का उपचार .. Remedial measures 
अधिगम की कठिनाईयों का उपचार करने के लिए निम्नांकित उपाय सुझाये गये

1.बालक का विश्लेषण (Analysis of the learner): 
यह विश्लेषण बालक की सृजनात्मक प्रक्रियाओं, विकासात्मक अवस्थाओं तथा परीक्षणों से संबंधित किया जाना चाहिए।

2.विषय वस्तु का विश्लेषण (Content analysis): 
यह विश्लेषण विशिष्ट तकनीकों, कौशलों एवं विषय सामग्री के संबंध में किया जाना चाहिए।

3. वातावरणीय दशाओं का विश्लेषण (Analysis of environmental situations): 
इसके अन्तर्गत मनोचिकीत्सीय, व्यवहारात्मक, शिक्षण शास्त्रीय परिस्थितियों. का विश्लेषण आता है।

उपर्युक्त तकनीकों का उपयोग कर अधिगम संबंधी कठिनाईयों का उपचार किया जाना चाहिए।
अधिगम कठिनाईयों से क्या तात्पर्य है? इनका निदान कैसे किया जा सकता है तथा ये कितने प्रकार की हैं?
ENT

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